मोबाइल ऐप और वेबसाइट आपके बिजनेस के लिए क्या सही है?

 Mobile App vs Website

एक Business Owner अपने Business को जब भी Online लाना चाहता है तो वो सब से पहले सोचता है की Mobile App बनाए या फिर Website.

इसलिए आप Mobile app Vs Website को लेकर हमेशा Confused रहते है। यह Question आपके मन मे आना बिल्कुल सही है,

इसका जवाब (Answer) के लिए आप Youtube या Google Search मे जा कर बहुत से Article और Youtube videos देखते है की आपके business के लिए क्या Best है, पर आपको सवालों का सही से जवाब (Answer) नहीं मिलता है।

इसलिए हमने इस Article को बहुत Simple तरीके से और Clarity के साथ तैयार किया है, जहा आपके सारे सवालों (Question) का जवाब (Answer ) एक साथ एक ही blog और इस video के अंदर मिल जाये की, आपके business के लिए Mobile App सही है या Website?

👉 इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको पूरी क्लेरिटी मिल जाएगी कि –

  • किस तरह के बिजनेस में मोबाइल ऐप जरूरी है
  • किस तरह के बिजनेस में वेबसाइट काफी है
  • कहां मोबाइल ऐप और वेबसाइट दोनों का बैलेंस सबसे अच्छा रहता है
  • और साथ ही कॉस्ट, स्पीड और कस्टमर रीच के हिसाब से Mobile App vs Website – Aapke Business Ke Liye Kya Best Hai

तो चलिए शुरू करते हैं और समझते हैं कि आपके बिजनेस के लिए कौन सा प्लेटफॉर्म सही है।

Mobile App Banwaye ya Website – बिजनेस टाइप पर निर्भर

Mobile App vs Website

सबसे महत्वपूर्ण चीज है जिस पर यह डिसाइड होता है कि आपको वेबसाइट बनाना चाहिए या मोबाइल ऐप – और वह है आपका बिजनेस टाइप। यहीं पर असली फर्क आता है कि mobile app vs web app में से कौन सा आपके बिजनेस के लिए बेहतर रहेगा।

High Frequency Transaction वाले बिजनेस

अगर आपका कोई ऐसा बिजनेस है जहां पर हाई फ्रीक्वेंसी ट्रांजैक्शन हो रहा है यानी बार-बार खरीदारी हो रही है, तो वहां पर आपको मोबाइल ऐप बनवाना चाहिए।

उदाहरण के लिए अगर आपका ग्रोसरी स्टोर है, फार्मा का दुकान है या फिर कोई भी ऐसा बिजनेस है जहां पर कस्टमर बार-बार खरीदारी करता है तो वहां मोबाइल ऐप ही बनवाना चाहिए।

मोबाइल ऐप बनवाने से फायदा यह होता है कि कस्टमर एक बार अगर आपके दुकान पर आकर परचेस करता है तो उसके रेगुलर कस्टमर बनने का चांस बढ़ जाता है। जैसे कि अगर आपका ग्रोसरी स्टोर है, मिल्क डेरी की सर्विस है, या दवाइयों का फार्मास्यूटिकल का काम है तो यह सब रेगुलर जरूरत की चीजें हैं जो हर घर में बार-बार खरीदनी ही पड़ती हैं। इसलिए ऐसे बिजनेस में मोबाइल ऐप बनवाना ही चाहिए। यही Mobile app vs website who is best? का पहला बड़ा अंतर है।

 Medium Frequency वाले बिजनेस

अगर आपका बिजनेस ऐसा है जहां मीडियम फ्रीक्वेंसी है, यानी महीने में 1–2 बार कस्टमर आता है, तो वहां वेबसाइट ज्यादा सही है।

उदाहरण: जिम का मेंबरशिप, कोचिंग इंस्टिट्यूट, फैशन बुटीक, हेयर सैलून – इन जगहों पर लोग महीने में एक-दो बार ही आते हैं।इस केस में आपको वेबसाइट बनवानी चाहिए। मोबाइल ऐप ऑप्शनल है। अगर आप चाहें तो मोबाइल ऐप भी बनवा सकते हैं लेकिन जरूरी नहीं। क्योंकि यहां पर कस्टमर रेगुलर नहीं आ रहा है। यहां आपको सोचना होगा कि mobile app and web app दोनों में से कौन सा आपके खर्च और जरूरत के हिसाब से फिट बैठता है।

Low Frequency वाले बिजनेस

अगर आपका बिजनेस ऐसा है जहां पर लो फ्रीक्वेंसी है यानी कस्टमर वन-टाइम परचेस करता है, वहां मोबाइल ऐप की कोई जरूरत नहीं है।

उदाहरण: इवेंट मैनेजमेंट का काम, शादी का काम, रियल एस्टेट – इन सब जगहों पर कस्टमर बार-बार नहीं आता।जैसे कि शादी – एक आदमी बार-बार शादी नहीं करेगा। या फिर रियल एस्टेट – आदमी अपनी पूरी जिंदगी में दो-तीन बार ही फ्लैट खरीदेगा, और बहुत सारे लोग तो सिर्फ एक ही बार फ्लैट खरीदते हैं। इसलिए इस केस में मोबाइल ऐप की जरूरत नहीं है, यहां वेबसाइट ही बेस्ट है। ऐसे केस में Mobile App vs Website – Aapke Business Ke Liye Kya Best Hai? का चुनाव बिल्कुल क्लियर है।

Lead Generation वाले बिजनेस

अगर आपका बिजनेस लीड जनरेशन पर फोकस्ड है तो वहां पर मोबाइल ऐप की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। वहां पर सिर्फ वेबसाइट ही चाहिए।

उदाहरण: कंसल्टेंसी, CA, लॉयर, ऑफलाइन कोचिंग इंस्टिट्यूट – यहां पर मेन काम यह है कि आपको इनक्वायरी आ जाए, कोई फॉर्म भर दे, बाकी का सारा प्रोसेस मैनुअल होता है। इसलिए वेबसाइट ही काफी है। यहां पर भी आपको सोचना है कि mobile app and web app में से कौन सा आपके बिजनेस मॉडल के लिए जरूरी है।

Customer Loyalty & Retention वाले बिजनेस

अगर आपके बिजनेस में कस्टमर लॉयलिटी और रिटेंशन ज्यादा जरूरी है तो वहां पर मोबाइल ऐप बनवाना चाहिए।उदाहरण: कॉफी शॉप, रेस्टोरेंट – यहां पर आप कस्टमर को रेगुलर डिस्काउंट या ऑफर का नोटिफिकेशन भेज सकते हैं। इससे फायदा यह होता है कि जो कस्टमर साल में एक बार आपके पास आता था, वो साल में तीन-चार बार आ सकता है। इस तरह मोबाइल ऐप से कस्टमर रिटेंशन और लॉयलिटी बढ़ जाती है। यही वजह है कि कई जगह Mobile app vs website का जवाब मोबाइल ऐप ही निकलता है।

Customer Reach – Website vs Mobile App

अगर कस्टमर रीच की बात करें तो वेबसाइट ज्यादा सही है क्योंकि वेबसाइट Google पर आसानी से रैंक कर सकती है और कोई भी व्यक्ति सर्च करके आपकी वेबसाइट तक पहुंच सकता है।

मोबाइल ऐप को डायरेक्टली डिस्कवर करना बहुत मुश्किल होता है। अगर आपके पास वेबसाइट नहीं है तो सिर्फ मोबाइल ऐप के जरिए Google पर रैंक करना बहुत Difficult होता है। यही पर mobile app and web app में सबसे बड़ा difference नजर आता है।

Cost और Speed of Launch

मोबाइल ऐप वेबसाइट की Compare में कॉस्टली होता है। यानी वेबसाइट सस्ती और जल्दी बन जाती है, जबकि मोबाइल ऐप महंगा और टाइम टेकिंग होता है।अगर आपको मोबाइल ऐप और वेबसाइट दोनों चाहिए, जैसे कि Zomato और Swiggy में होता है, तो आप Hybrid Technology का इस्तेमाल कर सकते हैं। Hybrid Technology से कॉस्ट भी बचता है और एक ही ऐप से वेबसाइट और मोबाइल ऐप दोनों का काम हो जाता है। यह पॉइंट भी Mobile app vs website को अच्छे से समझाता है।

बोनस ऑफर्स और कंसल्टेंसी

अगर आप वीडियो को लास्ट तक देखते हैं तो आपको दो बोनस मिलते हैं।

  1. 50 बिजनेस टिप्स ईमेल सीरीज – जहां पर हर वीक आपके ईमेल इनबॉक्स में बिजनेस टिप्स भेजे जाएंगे, बिल्कुल फ्री।

2. Free Consultancy – जहां मेरी टीम आपको डायरेक्ट आपके बिजनेस के हिसाब से यह बताएगी कि आपके लिए मोबाइल ऐप सही है या वेबसाइट, और साथ ही एक Approximate Cost का आइडिया भी देगी।

FAQs

Q1. बिजनेस के लिए मोबाइल ऐप सही है या वेबसाइट?
यह पूरी तरह बिजनेस टाइप पर डिपेंड करता है। हाई फ्रीक्वेंसी बिजनेस में मोबाइल ऐप सही है और लो फ्रीक्वेंसी बिजनेस में वेबसाइट सही है। यही असली Mobile app vs website का जवाब है।

Q2. क्या हर बिजनेस को मोबाइल ऐप की जरूरत है?
नहीं, सिर्फ उन्हीं बिजनेस को मोबाइल ऐप चाहिए जहां बार-बार कस्टमर आता है या कस्टमर लॉयलिटी जरूरी है।

Q3. वेबसाइट का फायदा क्या है?
वेबसाइट Google पर रैंक कर सकती है, ज्यादा कस्टमर तक पहुंच सकती है और बनाने में सस्ती और जल्दी होती है। यही वजह है कि mobile app and web app में वेबसाइट अक्सर बेहतर रहती है।

Q4. क्या मोबाइल ऐप और वेबसाइट दोनों बनाए जा सकते हैं?
हां, Hybrid Technology से दोनों बनाए जा सकते हैं और इससे कॉस्ट भी कम आता है।

Conclusion – Mobile App vs Website?

अब आपको क्लियर हो गया होगा कि आपके बिजनेस के लिए मोबाइल ऐप सही है या वेबसाइट। यह पूरी तरह आपके बिजनेस के टाइप, कस्टमर फ्रीक्वेंसी, कस्टमर रीच और कॉस्ट पर डिपेंड करता है।अगर आप अभी भी कंफ्यूज हैं तो Free Consultancy जरूर लें। वहां पर आपकी टीम आपके बिजनेस को समझेगी और बताएगी कि आपके लिए क्या सही है और कितना खर्च आएगा। यही असली गाइड है जो Mobile app vs website और mobile app and web app दोनों का सही उपयोग समझाती है।

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